Silver Price: दिवाली से पहले चांदी में भारी गिरावट, 2 लाख से नीचे आया भाव; रिकॉर्ड हाई से 55% टूटी कीमत

दिवाली से पहले चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने खरीदारों और निवेशकों, दोनों का ध्यान खींचा है. जिस त्योहारी सीजन में कीमती धातुओं की मांग बढ़ने की उम्मीद रहती है, उसी दौरान चांदी का भाव एमसीएक्स पर 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के नीचे पहुंच गया.

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दिवाली से पहले चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने खरीदारों और निवेशकों, दोनों का ध्यान खींचा है. जिस त्योहारी सीजन में कीमती धातुओं की मांग बढ़ने की उम्मीद रहती है, उसी दौरान चांदी का भाव एमसीएक्स पर 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के नीचे पहुंच गया. महज दो दिनों में कीमतों में करीब 17,000 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है. ऐसे में जिन लोगों को दिवाली पर चांदी के सिक्के, बर्तन या गहने खरीदने हैं, उनके मन में सवाल है कि क्या यह खरीदारी का अच्छा मौका है या कीमतों में अभी और गिरावट आ सकती है.

2 लाख रुपये से नीचे पहुंची चांदी की कीमत

शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर एक्सपायरी वाली चांदी वायदा कीमत करीब 3.5 फीसदी यानी 7,000 रुपये गिरकर 1,92,800 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई. इससे पहले दो कारोबारी दिनों में चांदी की कीमतों में कुल मिलाकर लगभग 17,000 रुपये की गिरावट दर्ज की गई थी. दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, साल की शुरुआत में दर्ज 4.27 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर से चांदी का भाव करीब 55 फीसदी नीचे आ चुका है. इस बड़ी गिरावट ने बाजार में कीमतों की आगे की दिशा को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है.

दिवाली से पहले चांदी खरीदना फायदेमंद होगा?

त्योहारी सीजन में चांदी के सिक्कों, बर्तनों और आभूषणों की मांग बढ़ सकती है. ऐसे में मौजूदा गिरावट उन लोगों के लिए राहत लेकर आई है, जो दिवाली पर चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं. अगर खरीदारी निजी इस्तेमाल या त्योहार की जरूरत के लिए करनी है, तो मौजूदा भाव पर स्थानीय बाजार की कीमतों की तुलना की जा सकती है. हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि दिवाली नजदीक आते ही चांदी की कीमतें बढ़ने लगें. खरीदारी से पहले उस दिन का खुदरा भाव, जीएसटी और मेकिंग चार्ज जैसे खर्च भी जरूर जांचें.

सरकार ने चांदी के आयात को दी मंजूरी

भारत चांदी की मांग पूरी करने के लिए आयात पर काफी हद तक निर्भर है. दी गई जानकारी के अनुसार, देश में इस्तेमाल होने वाली चांदी का करीब 80 फीसदी हिस्सा विदेशों से आता है. सरकार की ओर से चांदी के आयात को मंजूरी दिए जाने से घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है. हालांकि, आयात की अनुमति मिलने का मतलब यह नहीं है कि कीमतें निश्चित रूप से नीचे आएंगी. चांदी का भाव अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर-रुपये की विनिमय दर, औद्योगिक मांग और निवेशकों की खरीद-बिक्री जैसे कई कारकों से प्रभावित होता है.

निवेश के लिए अभी चांदी खरीदें या करें इंतजार?

चांदी में निवेश करने की योजना बना रहे लोगों को हालिया गिरावट के साथ-साथ बाजार में जारी उतार-चढ़ाव पर भी ध्यान देना चाहिए. कीमतों में तेज गिरावट के बाद आगे और गिरावट आएगी या भाव फिर संभलेंगे, इसका निश्चित अनुमान लगाना संभव नहीं है. ऐसे में केवल इस उम्मीद में एकमुश्त निवेश करना कि चांदी जल्द महंगी हो जाएगी, जोखिम भरा हो सकता है. निवेश का फैसला अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम सहने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखकर लें. अगर खरीदारी का उद्देश्य लंबे समय के लिए निवेश करना है, तो मौजूदा कीमतों की तुलना ऐतिहासिक स्तरों और दूसरे निवेश विकल्पों से करना बेहतर होगा.

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