Dollar के सामने रुपये की दहाड़! लगातार तीसरे दिन चमका, 3 दिन में इतनी बढ़ी ताकत

डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर पड़ रहे रुपये को आखिरकार राहत मिलती दिखाई दे रही है. भारतीय मुद्रा ने लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूती दर्ज कर बाजार का ध्यान अपनी ओर खींचा है.

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डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर पड़ रहे रुपये को आखिरकार राहत मिलती दिखाई दे रही है. भारतीय मुद्रा ने लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूती दर्ज कर बाजार का ध्यान अपनी ओर खींचा है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए कदमों, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और डॉलर की कमजोरी ने रुपये को संभलने का मौका दिया है. 

मंगलवार को रुपया 40 पैसे की बढ़त के साथ 95.38 रुपये प्रति डॉलर के अस्थायी स्तर पर बंद हुआ. पिछले तीन कारोबारी सत्रों में भारतीय मुद्रा कुल 1.50 रुपये मजबूत हो चुकी है. हालांकि, इस तेजी के बावजूद रुपये के सामने वैश्विक आर्थिक चुनौतियां बनी हुई हैं.

लगातार तीसरे दिन मजबूत हुआ रुपया

मंगलवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.53 पर खुला. कारोबार के दौरान यह 94.96 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा, जबकि इसका निचला स्तर 95.53 रहा. आखिर में भारतीय मुद्रा 40 पैसे की बढ़त के साथ 95.38 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई. 

इससे पहले सोमवार को रुपये ने 93 पैसे की छलांग लगाई थी और डॉलर के मुकाबले 95.78 के स्तर पर बंद हुआ था. सोमवार की यह तेजी छह महीने से अधिक समय में रुपये की सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़त में से एक रही. इस तरह तीन कारोबारी सत्रों में रुपये की कुल मजबूती 150 पैसे तक पहुंच गई.

RBI के फैसलों से रुपये को मिला सहारा

रुपये की इस रिकवरी के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक के हालिया नियामकीय कदमों की अहम भूमिका मानी जा रही है. केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये पर दबाव कम करने और डॉलर की मांग को नियंत्रित करने के लिए कई उपाय किए हैं. इसके तहत तेल विपणन कंपनियों के लिए निर्धारित बैंकों के माध्यम से डॉलर खरीदने की विशेष व्यवस्था की गई है. 

इससे इन कंपनियों की डॉलर संबंधी मांग का कुछ हिस्सा सीधे स्पॉट मार्केट पर आने से रोका जा सकेगा. इसके अलावा, विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कारोबार के नियम सख्त किए गए हैं, ताकि रुपये के खिलाफ अत्यधिक सट्टेबाजी पर अंकुश लगाया जा सके. बाजार के जानकारों का मानना है कि इन कदमों से डॉलर की मांग घटाने और भारतीय मुद्रा को स्थिरता देने में मदद मिल सकती है.

डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का फायदा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कमजोरी और कच्चे तेल के दाम में नरमी ने भी रुपये की तेजी को समर्थन दिया. मंगलवार को छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति बताने वाला डॉलर इंडेक्स 0.26 प्रतिशत गिरकर 102.32 पर आ गया. 

वहीं, ब्रेंट क्रूड की कीमत वायदा कारोबार में 1.93 प्रतिशत घटकर 104.59 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है और इसके भुगतान के लिए डॉलर की जरूरत होती है. ऐसे में तेल की कीमतों में गिरावट से देश के आयात बिल और डॉलर की मांग पर दबाव कम हो सकता है. यही वजह है कि कच्चे तेल की नरमी को रुपये के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.

शेयर बाजार में तेजी से भी बेहतर हुआ माहौल

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को आई तेजी ने भी घरेलू वित्तीय बाजारों का माहौल बेहतर किया. कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,109.10 अंक उछलकर 73,033.78 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 358.60 अंक की बढ़त के साथ 22,721.95 पर पहुंच गया. हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली चिंता का विषय बनी हुई है. 

एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध आधार पर 1,708.48 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से डॉलर की मांग बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है. इसलिए शेयर बाजार की तेजी के बावजूद विदेशी पूंजी का रुख आगे भी अहम बना रहेगा.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रुपये पर क्या कहा?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि पिछले डेढ़ साल में रुपये की कीमत में काफी गिरावट आई है. उन्होंने संकेत दिया कि भारतीय रिजर्व बैंक घरेलू मुद्रा में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए प्रयास जारी रखेगा. वित्त मंत्री के मुताबिक, रुपये में उतार-चढ़ाव के पीछे बाहरी चुनौतियां प्रमुख कारण हैं. 

सरकार की कोशिश है कि देश के आर्थिक बुनियादी कारक मजबूत बने रहें. ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियां भारतीय मुद्रा पर दबाव डाल रही हैं, RBI के कदमों और सरकार के रुख को बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

क्या डॉलर के मुकाबले और मजबूत होगा रुपया?

रुपये की हालिया तेजी से आगे भी मजबूती की उम्मीद जगी है, लेकिन बाजार विशेषज्ञ इस मामले में सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं. HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार के अनुसार, RBI के नियामकीय उपायों, डॉलर की कमजोरी, कच्चे तेल की घटती कीमतों और घरेलू शेयर बाजार में सुधार ने रुपये को सहारा दिया है. 

स्पॉट USD/INR जोड़ी के लिए 95 रुपये का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है. यदि यह स्तर मजबूती से टूटता है, तो डॉलर के मुकाबले रुपया 94.50 तक पहुंच सकता है. हालांकि, वैश्विक आर्थिक दबाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और तेल की कीमतों में संभावित उतार-चढ़ाव रुपये की आगे की तेजी को सीमित कर सकते हैं. इसलिए लगातार तीन दिन की बढ़त के बावजूद यह कहना जल्दबाजी होगी कि रुपये की गिरावट का दौर पूरी तरह खत्म हो गया है.

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