स्मार्टफोन में मौजूद निजी तस्वीरें, मैसेज, कॉन्टैक्ट्स और दूसरी संवेदनशील जानकारियां कितनी सुरक्षित हैं, यह सवाल एक नए साइबर खतरे ने फिर खड़ा कर दिया है. अब हैकर्स यूजर्स को किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने या फर्जी ऐप डाउनलोड करने के लिए मजबूर किए बिना भी उनके डिवाइस को निशाना बना सकते हैं. इस तरह के हमले को जीरो-क्लिक अटैक (Zero-Click Attack) कहा जाता है. हालिया साइबर सुरक्षा रिपोर्टों में सामने आया है कि ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए भी इस तरह के हमलों को अंजाम दिया जा सकता है. ऐसे में आईफोन इस्तेमाल करने वालों के लिए डिजिटल सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना जरूरी है.
क्या है जीरो-क्लिक अटैक और कैसे करता है काम?
आमतौर पर साइबर अपराधी लोगों को फर्जी मैसेज, ईमेल या वेबसाइट के जरिए अपने जाल में फंसाते हैं. यूजर जैसे ही किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करता है या कोई नुकसानदायक फाइल डाउनलोड करता है, उसका डिवाइस खतरे में पड़ सकता है. लेकिन जीरो-क्लिक अटैक में यूजर को ऐसा कुछ करने की जरूरत नहीं होती. डिवाइस के ऑपरेटिंग सिस्टम, ब्राउजर या किसी ऐप में मौजूद सुरक्षा खामी का फायदा उठाकर हमलावर स्पाईवेयर या मैलवेयर इंस्टॉल करने की कोशिश कर सकते हैं. इस वजह से ऐसे हमलों का पता लगाना भी मुश्किल हो सकता है.
विज्ञापनों के जरिए भी निशाना बना सकते हैं हैकर्स
साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने अक्टूबर 2026 में ऐसे अभियान का खुलासा किया, जिसमें ऑनलाइन विज्ञापन नेटवर्क के जरिए जीरो-क्लिक स्पाईवेयर पहुंचाने की बात सामने आई. रिपोर्ट के मुताबिक, AdFection नाम के इस अभियान में विज्ञापनों की मदद से खास लोगों के मोबाइल डिवाइस को निशाना बनाया गया. कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो की सिटिजन लैब के शोधकर्ताओं ने अल जजीरा मीडिया संगठन के 45 डिवाइस में इस अभियान से जुड़े संक्रमण की पुष्टि की. जांच में सामने आया कि विज्ञापन दिखने के दौरान ही डिवाइस पर हमला करने की कोशिश की जा सकती थी, यानी यूजर को विज्ञापन पर क्लिक करना जरूरी नहीं था. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर विज्ञापन या हर आईफोन इस तरह के हमले का शिकार है.
फोन का डेटा चोरी होने का कितना खतरा?
अगर किसी डिवाइस में स्पाईवेयर सफलतापूर्वक इंस्टॉल हो जाता है, तो उसकी क्षमताओं के आधार पर निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है. इसमें कॉन्टैक्ट्स, मैसेज, फोटो, ब्राउजिंग से जुड़ी जानकारी और अन्य संवेदनशील डेटा शामिल हो सकता है. कुछ उन्नत स्पाईवेयर डिवाइस की गतिविधियों पर नजर रखने या माइक्रोफोन और कैमरे तक पहुंच बनाने में भी सक्षम हो सकते हैं. हालांकि, किसी खास हमले में कौन-सा डेटा चोरी हुआ, यह इस्तेमाल किए गए मैलवेयर और उपलब्ध फॉरेंसिक सबूतों पर निर्भर करता है. इसलिए बिना जांच के यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर प्रभावित फोन का पूरा डेटा चोरी हो चुका है.
iPhone यूजर्स अपने फोन को कैसे सुरक्षित रखें?
ऐसे साइबर हमलों से बचने के लिए सबसे जरूरी कदम आईफोन और उसमें मौजूद ऐप्स को हमेशा नवीनतम उपलब्ध सॉफ्टवेयर वर्जन पर अपडेट रखना है. अपडेट में अक्सर सुरक्षा खामियों को ठीक करने वाले पैच शामिल होते हैं. इसके अलावा, अनजान वेबसाइटों से बचें, संदिग्ध प्रोफाइल या ऐप इंस्टॉल न करें और अपने Apple Account की सुरक्षा को मजबूत रखें. यदि Apple की ओर से स्पाईवेयर हमले को लेकर आधिकारिक थ्रेट नोटिफिकेशन मिलता है, तो उसे गंभीरता से लें और कंपनी की आधिकारिक सलाह का पालन करें. ज्यादा जोखिम वाले यूजर्स Lockdown Mode जैसे सुरक्षा फीचर पर भी विचार कर सकते हैं.
क्या सिर्फ आईफोन यूजर्स को है खतरा?
जीरो-क्लिक अटैक का खतरा केवल आईफोन तक सीमित नहीं है. अलग-अलग ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप्स में मौजूद सुरक्षा खामियों का फायदा उठाकर कई तरह के डिवाइस निशाना बनाए जा सकते हैं. हालांकि, अत्याधुनिक और महंगे स्पाईवेयर अभियान अक्सर चुनिंदा लोगों, जैसे पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं या महत्वपूर्ण संस्थानों से जुड़े व्यक्तियों को टारगेट करते हैं. आम यूजर्स के लिए इसका मतलब यह है कि घबराने के बजाय अपने डिवाइस को अपडेट रखना, डिजिटल सुरक्षा के नियमों का पालन करना और असामान्य सुरक्षा अलर्ट को नजरअंदाज न करना ज्यादा जरूरी है.
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