त्योहारी सीजन शुरू होते ही देश के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है. नवरात्रि से लेकर दिवाली और छठ पूजा तक खरीदारी, सजावट, खानपान और यात्रा से जुड़ी गतिविधियां व्यापार को नई गति दे सकती हैं. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इस साल नवरात्रि से दिवाली तक देशभर में त्योहारी कारोबार ₹7 लाख करोड़ के पार पहुंच सकता है. यह अनुमान व्यापारिक संगठनों से मिले फीडबैक, ग्राहकों की खरीदारी की रुचि, ग्रामीण बाजारों में बढ़ती गतिविधियों और स्थानीय उत्पादों की मांग को ध्यान में रखकर लगाया गया है.
पिछले साल ₹6.05 लाख करोड़ का हुआ था कारोबार
कैट के मुताबिक, पिछले साल दिवाली के दौरान देश में करीब ₹6.05 लाख करोड़ का रिकॉर्ड कारोबार दर्ज किया गया था. इसमें लगभग ₹5.40 लाख करोड़ का वस्तुओं से जुड़ा व्यापार और ₹65,000 करोड़ का सेवा क्षेत्र का कारोबार शामिल था. इस बार त्योहारों की लंबी अवधि और बाजारों में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए कारोबार ₹7 लाख करोड़ से अधिक रहने का अनुमान लगाया गया है. हालांकि, यह कैट का शुरुआती आकलन है, अंतिम आंकड़े वास्तविक खरीदारी और बाजार की गतिविधियों के आधार पर अलग हो सकते हैं.
किराना, सोना और इलेक्ट्रॉनिक्स की खरीदारी पर रहेगी नजर
त्योहारी खरीदारी के दौरान रोजमर्रा के सामान से लेकर महंगे उत्पादों तक कई क्षेत्रों में मांग बढ़ने की उम्मीद है. कैट के अनुमान में किराना और FMCG की हिस्सेदारी करीब 12 प्रतिशत, जबकि सोना, चांदी और आभूषणों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत रह सकती है. इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल्स का हिस्सा लगभग 8 प्रतिशत, वहीं कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रेडीमेड कपड़ों और गिफ्ट आइटम्स का हिस्सा करीब 7-7 प्रतिशत रहने का अनुमान है. होम डेकोर, फर्नीचर, मिठाई-नमकीन, कपड़े, पूजा सामग्री, फल और ड्राई फ्रूट्स जैसे क्षेत्रों को भी त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग से फायदा मिल सकता है.
सर्विस सेक्टर में भी बढ़ेगी कमाई
त्योहारी कारोबार का फायदा सिर्फ दुकानदारों और सामान बेचने वाले कारोबारियों तक सीमित नहीं रहेगा. कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल के मुताबिक, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स डिलीवरी, पैकेजिंग, वेयरहाउसिंग, होटल, रेस्तरां, पर्यटन, कैटरिंग और इवेंट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में भी मांग बढ़ सकती है. पिछले साल सेवा क्षेत्र में करीब ₹65,000 करोड़ का कारोबार हुआ था, जबकि इस बार इसमें 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का शुरुआती अनुमान है. इसके आधार पर सेवा क्षेत्र का कारोबार ₹80,000 करोड़ से ₹1 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है.
त्योहारों से बाजारों को मिलेगा सहारा
नवरात्रि से दिवाली और छठ पूजा तक देशभर में धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों की भी धूम रहती है. रामलीला, दुर्गा पूजा पंडाल, गरबा-डांडिया, दिवाली मिलन समारोह, मेले, प्रदर्शनियां और सामुदायिक आयोजन कई छोटे-बड़े कारोबारों के लिए कमाई के अवसर पैदा करते हैं. इन गतिविधियों से सजावट, लाइटिंग, फूल, कपड़े, मिठाई, भोजन, कैटरिंग, होटल, परिवहन, फोटोग्राफी और सुरक्षा सेवाओं की मांग बढ़ सकती है. इस तरह त्योहारों का असर स्थानीय दुकानों से लेकर डिलीवरी और इवेंट मैनेजमेंट तक पूरे कारोबारी नेटवर्क पर पड़ने की संभावना है.
छोटे कारोबारियों से लेकर बड़े बाजारों तक रहेंगी उम्मीदें
त्योहारी सीजन में बढ़ती खरीदारी से छोटे दुकानदारों, स्थानीय उत्पाद बनाने वालों, कारीगरों और सेवा प्रदाताओं को भी अवसर मिल सकता है. ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाजारों में मांग बढ़ने तथा स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी को प्रोत्साहन मिलने से कारोबार का दायरा और व्यापक हो सकता है. कैट का ₹7 लाख करोड़ से अधिक कारोबार का अनुमान इसी संभावित तेजी को दर्शाता है. हालांकि, वास्तविक कारोबार कितना रहता है, यह ग्राहकों के खर्च, वस्तुओं की कीमतों और बाजारों में खरीदारी के रुझान पर निर्भर करेगा.
ये भी पढ़ें: रेलवे कर्मचारियों को दिवाली का तोहफा, 78 दिन के बोनस को मंजूरी, जानें कितने रुपये मिलेंगे