EC ने दिल्ली चुनाव 2025 की तारीखों का किया ऐलान, 5 फरवरी को 1 फेज में होगा मतदान, नतीजे 8 फरवरी को

    मुख्य चुनाव आयुक्ता राजीव कुमार ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन चुनाव की तारीखों का ऐलान किया और चुनाव में गड़बड़ियों को लेकर सभी आरोपों का जवाब दिया.

    EC ने दिल्ली चुनाव 2025 की तारीखों का किया ऐलान, 5 फरवरी को 1 फेज में होगा मतदान, नतीजे 8 फरवरी को
    मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान करने के दौरान | Photo- ECI के यूट्यूब हैंडल से ग्रैब्ड.

    नई दिल्ली : भारत के चुनाव आयोग ने मंगलवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का ऐलान कर दिया है. राज्य के चुनाव एक फेज में होंगे  5 फरवरी को होंगे और नतीजे 8 फरवरी को आएंगे.

    मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा, "नये साल में पहली बारी दिल्ली की है. पूरी दिल्ली में देश की विविधता दिखती है. दिल्ली दिल से वोट करेगी ऐसा हमें उम्मीद है."

    दिल्ली चुनाव में मतदाताओं की संख्या और सीट

    दिल्ली में 70 चुनाव क्षेत्र हैं. 58 जनरल सीट हैं और 12 सीटें एससी की हैं, यानि कि आरक्षित हैं. दिल्ली में कुल 1.55 करोड़ से ज़्यादा मतदाता पंजीकृत हैं. कोई भी पात्र नागरिक जो अभी तक पंजीकृत नहीं है, वह नामांकन की अंतिम तिथि से 10 दिन पहले तक पंजीकरण करा सकता है. 06.01.2025 तक मतदाताओं का विवरण चित्र में देखें.

    कुल 13 हजार पोलिंग बूथ बनाए गए हैं और वोटिंग की 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग होगी.  दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल  23 फरवरी, 2025 को समाप्त होगा.

    वहीं इससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने चुनावी गड़बड़ियों को लेकर तमाम जानकारी दी.

    राजीव कुमार ने दिल्ली चुनाव को लेकर जताई जा रही चिंताओं को लेकर कहा, "कहा जा रहा कि चुनाव में वोट जोड़े और घटाए जा रहे हैं. मैं आज सब बताऊंगा कि ऐसा हो सकता है क्या."

    "ईवीएम पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं. कैसे 5 बजे के बाद वोट बढ़ जाते हैं. इस तरह के सवालों का जवाब दूंगा. वोटिंग में मिस मैच हुआ. मतगणना स्लो की जा रही है. इस तरह के तमाम सवाल खड़े किए जा रहे हैं."

    उन्होंने कहा कि हर स्टेट में हर बूथ को मिलाएं तो तकरीबन 40 से 45 लाख लोग बूथ पर अधिकारी होते हैं. लोगों को लगता है कि ये धांधली करते हैं. कुमार ने कहा कि इन सवालों का किया जाना लोकतंत्र में जायज होता है. 

    राजीव कुमार ने चुनाव से जुड़े सवालों का जवाब

    राजीव कुमार ने कहा, "इलेक्ट्रोरल रोल, ईवीएम से जुड़े हर कदम पर पार्टियों के प्रतिनिधि साथ होते हैं. हर पार्टी को बीएलओ नियुक्त करने के अधिकार हैं. बिना फॉर्म 7 के वोट डिलीट नहीं हो सकता है. किसी की मृत्यु पर उसका डेथ सर्टिफिकेट लगाया जाता है. इस तरह तमाम जांच-पड़ताल की जाती है. फिर इसे तय किया जाता है"

    "एक सर्वे हर साल अक्टूबर में होता है. किसका नाम जोड़ना है, किसका हटाना है या कितने नाम हटाए गए हम पार्टियों को प्रतिनिधियों की एक-एक कॉपी देते हैं. 2 प्रतिशत से अधिक डिलीशन जहां भी होता है उसकी जांच की जाती है. नाम कटने पर 1 महीना टाइम होता है कि लोग अपना नाम हटा या जोड़ सकता हैं. कुछ गड़बड़ी पर हम एक्शन लेते हैं."

    "हम बहुत बार ईवीएम की बात कर चुके हैं. अब हम इसे पब्लिक डोमेन में ला रहे हैं. ईवीएम में एजेंट के सामने सिंबल डाले जाते हैं. उसी दिन नई बैटरी डाली जाती है. उन्हीं के सामने सील होती है. उन्हें के सामने उसकी सील तोड़ी जाती है."

    कुमार ने कहा, "हम हर ईवीएम की मॉक पोलिंग भी करते हैं. एजेंट के पोलिंग स्टेशन छोड़ने से पहले फॉर्म 17सी उन्हें भर कर सारे वोट की जानकारी दी जाती है. 5 रैंडमली सेलेक्टेड वीवीपैट की गिनती भी कराते हैं. फिर भी सवाल उठाए जा रहे हैं."

    हाईकोर्ट ने कहा है, "ईवीएम हैक हो ही नहीं सकती है. कोई रिगिंग संभव नही हैं. कोई मालवेयर नहीं डाला जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है. लिहाजा सारे आरोप आधारहीन हैं."

    चुनाव आयुक्त ने कहा कि सारे जवाब फॉर्म एओक्यू में उपलब्ध हैं, लोग देख सकते हैं.

    वोटिंग के बाद नंबर बढ़ने की बात पर दिया ये जवाब

    कुमार ने कहा कि जहां तक बाद में वोट बढ़ाने का सवाल है तो कहूंगा कि एक ग्लोबल इंजीनियर ने भी हैक करने की बात कही. वहीं अब कह रहे हैं कि हमें महीनों काउंटिंग में लग रहे, जबकि इंडिया में एक दिन में काउंटिंग हो जाती है.

    वह अप्रत्यक्ष तौर पर अमेरिका के टेस्ला और स्पेक्स कंपनी के प्रमुख एलन मस्क की ओर इशारा कर रहे थे.

    कुमार ने कहा, "साढ़े 5 बजे के बाद 5-7 बजे के बीच अधिकारी लाइन में लगे वोटर्स को पर्चियां बांटते हैं. फिर वोटिंग खत्म कराकर मशीन और बैटरी को सील करते हैं. फॉर्म 17 सी बनाने के बाद एजेंट से साइन कराकर उसे जमा करते हैं, जिसके बाद वोट बढ़ते हैं"

    ईसीआई चीफ ने कहा कि एजेंट को सब पता होता है कि बूथ पर कितने वोट पड़े. 11.30 बजे तक फिर एक प्रेस रिलीज करना शुरू किया. यह तुरंत बताना संभव नहीं होता है. यहां तक इंटरनेट कनेक्ट होने पर भी इसे बताना भी संभव नहीं है. अगले दिन हम एक स्क्रूटनी करते हैं. आब्जर्वर और एजेंट को बुलाते हैं.

    अब कहा जाता है कि वीवीपैट के वोट गिने जाएं और ईवीएम में पड़े वोट से मिलाया जाए. अभी तक 4.5 करोड़ स्लिप गिनी गई हैं. जो कि मशीन से बिल्कुल अलग नहीं थीं. सबके ऊपर हमने डिटेल्स जानकारी दी है. एक-एक चुनाव क्षेत्र का डेटा हमारे पास है. कृपया चुनाव निकाय की वेबसाइट पर जाएं और वहां से डेटा लें. सुप्रीम कोर्ट में भी हम इसका जवाब देंगे. 

    कृपया कोई सामान्य आरोप न लगाइए, कोई विशेष गड़बड़ी पूछिए हम जरूर जवाब देंगे. 

    कुमार ने शायरी पढ़कर आरोपों पर कसा तंज

    इसके बाद एक शायरी पढ़कर ईवीएम और चुनाव की गड़बड़ियों के आरोपों पर तंज कसा. 

    उन्होंने ये शायरी पढ़ी-

    "आरोप और इल्जामात का दौर चले, कोई गिला नहीं,
    झूठ के गुब्बारों को बुलंदी मिलें, कोई शिकवा नहीं,
    हर परिणाम में प्रमाण देते है,
    पर वो विना सबूत शक की नई दुनिया रौनक करते हैं
    और शक का इलाज तो हकीम लुकमान के पास भी नहीं!"

    कमीशन के रूल के मुताबिक 7 प्रकार के डाक्यूमेंट न देने की बात कही है. 17 ए फार्म में कहा गया है कि एजेंट की फाइनल साइन होती है. इसकी कॉपी इसलिए नहीं दी जाती ताकि निजता का उल्लंघन न हो. हमने सिर्फ एक बदलाव किया है.

    बूथ के अंदर की अगर फुटेज हम दे दें, मान लीजिए, अगर साढ़े 10 लाख बूथ पर सुबह से सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग शुरू होती है तो 10 घंटे भी रिकॉर्डिंग की मान लें तो लगभग 1 करोड़ घंटे होते हैं, जिसे देखना संभव नहीं है. 

    और एक-एक चीज का रिकार्डिंग देने से वोटर की सारी प्राइवेसी जाहिर हो जाएगी. अगर 1 चुनाव क्षेत्र की फुटेज दे दें तो उसे 10 घंटे भी देखें तो 6 साल लगेंगे. आखिर कोई इसे क्यों लेना चाहता है? लोग इसे लेकर मिसयूज करना चाहते हैं. पूछने का, मांगने का अधिकार सबको है. इस फुटेज का पहले मिसयूज किया गया है, इसलिए हम इसे चेंज कर रहे हैं. 

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    जहां तक महिलाओं पर भद्दे बयान दिए जा रहे हैं वह बहुत गलत हैं. उन पर भद्दे कमेंट्स नहीं किए जाने चाहिए. हम अभी एक्शन नहीं ले रहे हैं लेकिन हम दोबारा इस तरह बयान न देने की चेतावनी दे रहे हैं. इसको लेकर केस भी करेंगे अगर जरूरी हुआ तो.

    जहां तक फ्रीबीज का सवाल है तो इसको लेकर मामला कोर्ट में है. उसके बाद ही हम इसको लेकर कदम उठाएंगे. कई स्टेट तो इतने वादे कर दिए हैं कि वहां राज्य पर ऐसा असर पड़ा है कि लोगों को सैलरी देना मुश्किल हो गया है.

    1 फरवरी को बजट से लाभ लेने की बात जहां तक है तो हम आज ही निर्देश जारी करेंगे कि दिल्ली के लिए ऐसा कुछ ऐलान न हो, जिससे कि वोटर्स प्रभावित हों. 

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