यमन में एक बार फिर संघर्ष तेज होने के बीच अदन स्थित राष्ट्रपति भवन अल-माशिक पैलेस पर मिसाइल हमले की खबर सामने आई है. इस हमले में चार लोगों की मौत होने की जानकारी दी गई है. शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, हमले में सुरक्षा गार्डों को निशाना बनाया गया, जिनमें कई की मौत हो गई या वे गंभीर रूप से घायल हुए हैं. हमले में बैलिस्टिक मिसाइल के इस्तेमाल की बात कही जा रही है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है. इस घटना ने यमन में सुरक्षा हालात और क्षेत्रीय तनाव को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं.
राष्ट्रपति भवन पर हमले के वक्त सुरक्षित रहे प्रधानमंत्री
यमन की कैबिनेट की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, हमले के दौरान राष्ट्रपति भवन परिसर में मौजूद सुरक्षा कर्मियों को नुकसान पहुंचा है. वहीं, दो सरकारी अधिकारियों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि घटना के समय वहां मौजूद प्रधानमंत्री और अन्य मंत्री सुरक्षित हैं. फिलहाल हमले से जुड़े सभी तथ्यों और नुकसान का आकलन किया जा रहा है. इस बीच हूती विद्रोहियों ने एयरलाइंस को चेतावनी देते हुए कहा है कि सऊदी अरब का हवाई क्षेत्र और वहां के हवाई अड्डे सुरक्षित नहीं हैं.
हूतियों की बढ़ती गतिविधियों पर यमन सरकार की चिंता
यमन के समाचार आउटलेट सबा के मुताबिक, कैबिनेट ने राष्ट्रपति भवन पर हुए हमले को हूती विद्रोहियों की बढ़ती आक्रामक गतिविधियों से जोड़कर देखा है. सरकार ने ताइज और लाहिज के साथ-साथ सऊदी अरब के नागरिक इलाकों पर लगातार हो रहे हमलों का भी उल्लेख किया है. यमन में जारी संघर्ष के बीच ऐसे हमलों को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया जा रहा है. हालांकि, हमले की जिम्मेदारी और उससे जुड़ी परिस्थितियों के बारे में स्वतंत्र रूप से पुष्टि किए गए विवरण अभी सीमित हैं.
24 घंटे में 1,250 हमलों का सेना ने किया दावा
हूती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर यमन की सरकारी सेना ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाने का दावा किया है. सेना के मुताबिक, हूतियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस हासिल करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘डॉन ऑफ यमन’ अभियान के तहत पिछले 24 घंटों में 1,250 हमले किए गए. सेना के प्रवक्ता मजीद अल-नुजैली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि इन अभियानों में लड़ाकू विमानों, ड्रोन, तोपखाने और रॉकेट लॉन्चरों का इस्तेमाल किया गया. ये आंकड़े सेना के दावे पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है.
संघर्ष के और बढ़ने की आशंका
राष्ट्रपति भवन पर हमले और यमन की सरकारी सेना की जवाबी कार्रवाई के दावों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका है. सेना ने यह भी दावा किया है कि अभियान के दौरान हूतियों के 150 वाहन नष्ट किए गए. ऐसे घटनाक्रम का असर केवल यमन तक सीमित नहीं रह सकता, खासकर तब जब सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र और हवाई अड्डों को लेकर भी चेतावनी दी गई है. फिलहाल आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्षों की सैन्य गतिविधियां किस दिशा में बढ़ती हैं और क्या तनाव कम करने के लिए कोई कूटनीतिक पहल सामने आती है.
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