उत्तराखंड विधानसभा का मानसून सत्र 21 अगस्त से शुरू होकर 23 अगस्त तक चलेगा

    एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, उत्तराखंड विधानसभा का मानसून सत्र 21 अगस्त से शुरू होगा और 23 अगस्त तक चलेगा. राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में 21 अगस्त को सुबह करीब 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होगी.

    The monsoon session of Uttarakhand Assembly will start from August 21 and continue till August 23
    उत्तराखंड विधानसभा का मानसून सत्र 21 अगस्त से शुरू होकर 23 अगस्त तक चलेगा/Photo- ANI

    देहरादून: एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, उत्तराखंड विधानसभा का मानसून सत्र 21 अगस्त से शुरू होगा और 23 अगस्त तक चलेगा. राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में 21 अगस्त को सुबह करीब 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होगी.

    उत्तराखंड विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया है, "माननीय राज्यपाल, उत्तराखंड ने उत्तराखंड की पांचवीं विधानसभा को बुधवार, 21 अगस्त, 2024 को सुबह 11:00 बजे विधानसभा भवन, भराड़ीसैंण, गैरसैंण जिला चमोली में वर्ष 2024 के दूसरे सत्र के लिए बैठक के लिए बुलाया है."

    पुष्कर धामी ने सचिवालय में सचिव समिति की बैठक में हिस्सा लिया

    इससे पहले बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में सचिव समिति की बैठक में हिस्सा लिया. सीएम धामी सचिव समिति की बैठक में हिस्सा लेने वाले राज्य के पहले मुख्यमंत्री हैं. तीन घंटे तक चली इस बैठक में राज्यहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई. 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यहित से जुड़ी योजनाओं के नीति निर्धारण और सरकार द्वारा चलायी जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में सचिवों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.

    शासन और प्रशासन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं- धामी

    उन्होंने कहा कि सचिव सरकार और जनता के बीच सेतु का काम करते हैं. शासन और प्रशासन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. प्रदेश के हर क्षेत्र में विकास के साथ-साथ लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए हम सभी को सामूहिक प्रयास करने होंगे. लोगों के जीवन स्तर में सुधार के बिना राज्य के समग्र विकास की कल्पना नहीं की जा सकती.

    सीएम धामी ने कहा कि योजनाओं के बेहतर निर्माण के साथ ही उनके सफल क्रियान्वयन के लिए पूरी कार्ययोजना बनाई जाय. सरकार की योजनाएँ और निर्णय करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं; इसलिए, योजनाओं और निर्णयों में राष्ट्रीय और सार्वजनिक हित पहली प्राथमिकता होनी चाहिए.

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