Success Story: प्रतिकूल परिस्थितयों के बावजूद सपनों को किया साकार, घर में रहकर की तैयारी और बन गईं IAS

    वंदना सिंह चौहान ने प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने के लिए यूपीएसससी की तैयारी पूरी की.

    Success Story: प्रतिकूल परिस्थितयों के बावजूद सपनों को किया साकार, घर में रहकर की तैयारी और बन गईं IAS

    आज के समाज की सोंच बदली है. इसके साथ ही पहले की अपेक्षा लड़कियों के प्रति समाज की धारणा भी बदली है. अब महिलाएं पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा पढ़-लिख रहीं हैं. वो कंपनियों में अच्छे पदों पर नौकरी कर रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं. आज ऐसे ही एक आईएएस अफसर महिला की कहानी आपके सामने लेकर आए हैं.

    वंदना ने बड़ी मुश्किलों के साथ पूरी की पढ़ाई

    वंदना सिंह चौहान का जन्म हरियाणा केनसरुल्लागढ़ में हुआ था. उनका पालन-पोषण एक संयुक्त परिवार में हुआ. हरियाणा में लड़कियों को ज्यादा पढ़ाया-लिखाया नहीं जाता था. इसलिए वंदना बड़ी मुश्किल से अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की. इसके बाद वह आगे की पढ़ाई करने के लिए अपने पिता से दूसरे शहर जाने की जिद करने लगी. पहले तो पिता राजी नहीं हुए. फिर बहुत जिद करने के बाद आखिरकार पिता ने वंदना का दाखिला गुरुकुल में करवा दिया. हालांकि पिता के इस फैसले को लेकर उनके परिवार के लोगों ने काफी नाराजगी जताई.

    प्रतिकूल परिस्थितयों के बावजूद सपना हुआ साकार

    वंदना सिंह चौहान ने प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद लॉ की पढ़ाई करने के लिए एलएलबी में दाखिला लिया. लेकिन यूपीएसससी सिविल सेवा परीक्षा में सफल होने का सपना वंदना ने बचपन से देखा था. जिसे पूरा करने के लिए इसके साथ ही उसने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी भी शुरू कर दी. इस तरह वंदना ने हिम्मत नहीं हारी और अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए लगातार कड़ी मेहनत करती रही. आखिरकार उसने अपने मेहनत के बल पर यूपीएसससी सिविल सेवा की परीक्षा में सफल हुईं.

    यूपीएसससी परीक्षा में हासिल किया आठवां रैंक

    वंदना कहती है इस दौरान परिवार से सहयोग तो नहीं मिला लेकिन उनके भाई ने उनका भरपूर साथ दिया.  जिसकी वजह से वंदना ने घर पर रहकर ही देश की सबसे बड़ी एवं मुश्किल परीक्षा पास करते हुए इस परीक्षा में आठवीं रैंक को हासिल किया और देश में एक बाद फिर से महिलाओं ने समाज में अपना परचम लहराया दिया.