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स्मृति और पुराणों में परिवार, जीवन, समाज और राष्ट्र को बेहतर बनाने के लिए कई सूत्र दिए गए हैं.


हिंदू धर्म के मुताबिक व्यक्तिगत स्वतंत्रता बहुत मायने रखती है.


संसार में मुख्यत: दो प्रकार के धर्म हैं. पहला कर्म-प्रधान तो दूसरा विश्वास-प्रधान. हिन्दू धर्म कर्म-प्रधान है.


उदारता, सहिष्णुता, ध्यान और योग को प्रत्येक धर्म में प्राथमिकता दी गई है.


जीवन जीने की कला भी हिंदू धर्म में है, क्योंकि अनाड़ी ड्राइवर के हाथ में यदि कीमती गाड़ी दी जाए तो उसकी दुर्गति ही होगी.


हिंदू धर्म उत्सवों को महत्व देता है. जीवन में उत्साह और उत्सव होना जरूरी है.


अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष, ये चारों हिंदू धर्म के पुरुषार्थों में गिने जाते हैं


हिंदू धर्म में उदारता, सहिष्णुता, मानवता और लचीलेपन की भावना है


हिंदू धर्म में परोपकार की भावना को अहमियत दी गई है.


वर्तमान का हिंदू धर्म पुरातन में सनातन धर्म रहा है, हालांकि सनातन का जिक्र आज भी किया जाता है.


