US सुप्रीम कोर्ट से डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, टैरिफ को बताया गैरकानूनी, कहा - राष्ट्रपति को अधिकार नहीं

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए दूसरे देशों पर टैरिफ को गैरकानूनी ठहराया गया है.

US Supreme Court declares Donald Trump tariffs illegal
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वाशिंगटन: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए दूसरे देशों पर टैरिफ को गैरकानूनी ठहराया गया है. यह फैसला ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है, क्योंकि इससे उनकी व्यापार नीति को गंभीर चुनौती मिली है. कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि राष्ट्रपति ने बिना कांग्रेस की अनुमति के राष्ट्रीय आपातकालीन कानून का गलत इस्तेमाल करते हुए यह टैरिफ लगाए थे.

ट्रंप ने क्या तर्क दिया था?

राष्ट्रपति ट्रंप ने 1970 के दशक में लागू एक आपातकालीन कानून का हवाला देते हुए यह दावा किया था कि उन्हें दूसरे देशों से व्यापार में अनियंत्रित बदलावों को नियंत्रित करने का अधिकार है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि इस कानून में टैरिफ लगाने का उल्लेख नहीं था, और राष्ट्रपति को कांग्रेस की अनुमति के बिना यह कदम उठाने का अधिकार नहीं है.

अदालत का ऐतिहासिक फैसला

मुख्य न्यायाधीश जॉन जी. रॉबर्ट्स जूनियर ने बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है, क्योंकि यह शक्ति केवल कांग्रेस को ही दी गई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फैसले से अमेरिकी संविधान की मूल बातें प्रभावित होती हैं और इसके दायरे में आने वाले निर्णयों को सिर्फ संसद के माध्यम से ही लागू किया जा सकता है.

राष्ट्रपति की शक्तियों पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने राष्ट्रपति की व्यापक शक्तियों पर सवाल उठाया है. जस्टिस रॉबर्ट्स ने लिखा, "राष्ट्रपति असीमित मात्रा, अवधि और दायरे में एकतरफा टैरिफ लगाने की असाधारण शक्ति का दावा करते हैं, लेकिन इसे लागू करने के लिए उन्हें कांग्रेस की स्पष्ट अनुमति दिखानी होगी." इससे यह स्पष्ट हो गया कि राष्ट्रपति का दखल अब व्यापार संबंधी मामलों में सीमित होगा और उसे संसद की स्वीकृति की आवश्यकता होगी.

असहमति और विरोध

इस फैसले से तीन जज असहमत रहे. जस्टिस क्लैरेंस थॉमस, सैमुअल ए. एलिटो जूनियर और ब्रेट एम. कैवनॉ ने इस फैसले के खिलाफ अपनी असहमति जताई. उनका कहना था कि राष्ट्रपति को ऐसे कदम उठाने का अधिकार था, और यह निर्णय अमेरिका की व्यापार नीति को कमजोर कर सकता है.

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