भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रिश्तों में एक और सकारात्मक कदम सामने आया है. यूएई सरकार ने अपनी जेलों में बंद 900 से ज्यादा भारतीय नागरिकों की सूची भारत को सौंप दी है, जिन्हें रिहा किया जाना है. यह सूची अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों को सौंपी गई है, जिसके बाद रिहाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा.
इन भारतीय कैदियों को बीते वर्ष नवंबर में जारी राष्ट्रपति आदेश के तहत रिहा किया जाएगा. यह फैसला यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान ने लिया था, जिसमें भारत समेत कई देशों के नागरिकों को राहत देने की घोषणा की गई थी.
ईद अल-एतिहाद पर रिहाई का ऐलान
यूएई के राष्ट्रपति ने 27 नवंबर को ऐलान किया था कि देश के राष्ट्रीय उत्सव ईद अल-एतिहाद (नेशनल डे) के अवसर पर यूएई की जेलों में बंद 2937 विदेशी कैदियों को रिहा किया जाएगा. ईद अल-एतिहाद हर साल 2 दिसंबर को मनाया जाता है और यह वर्ष 1971 में अमीरातों के एकीकरण का प्रतीक है.
इस फैसले के तहत अलग-अलग देशों के नागरिकों को राहत दी गई, जिसमें भारतीय कैदियों की संख्या 900 से अधिक बताई जा रही है. अब इन सभी के नामों की औपचारिक सूची भारत को सौंप दी गई है.
जुर्माने की रकम भी यूएई सरकार ने चुकाई
यूएई सरकार ने इस मानवीय कदम को और प्रभावी बनाते हुए कैदियों पर लगाए गए जुर्माने की राशि भी खुद अदा की है. इससे रिहा होने वाले भारतीय नागरिकों को किसी भी आर्थिक बोझ का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे आसानी से अपने देश लौट सकेंगे.
बताया जा रहा है कि कई भारतीय नागरिक वीजा अवधि समाप्त होने, छोटे श्रम विवादों, या वित्तीय चूक जैसे मामलों में जेल में बंद थे. इन मामलों में लगने वाले जुर्माने की रकम उनके परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन गई थी.
सामाजिक स्थिरता और पुनर्वास की नीति
यूएई सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पहल केवल कैदियों की रिहाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक स्थिरता, मानवीय दृष्टिकोण और पुनर्वास के अवसर बढ़ाने की नीति का हिस्सा है. सरकार का मानना है कि इस तरह के फैसले समाज में सकारात्मक वातावरण बनाते हैं और लोगों को नई शुरुआत का मौका देते हैं.
भारत-यूएई रिश्तों में बढ़ती मजबूती
कैदियों की सूची सौंपे जाने का यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब हाल ही में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान ने भारत की यात्रा की थी. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी.
दोनों देशों के बीच इस बैठक में रणनीतिक रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति बनी थी. साथ ही यह लक्ष्य भी तय किया गया कि 2032 तक भारत-यूएई द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाएगा.
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