ग्लूकोमा और जटिल आंखों की बीमारियों से जूझ रही एक 44 वर्षीय स्त्री रोग विशेषज्ञ ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व सफलता हासिल की है. पिछले दस वर्षों से अंधी हो चुकी इस डॉक्टर की आंखों की रोशनी एक अत्याधुनिक और अनोखी सर्जरी के जरिए वापस लौट आई है, जिसने पूरी दुनिया के सामने एक नई सर्जिकल तकनीक को उजागर किया.
आंखों की रोशनी की खो चुकी थीं पूरी उम्मीद
इस डॉक्टर को पहले कई सर्जरी का सामना करना पड़ा था, लेकिन उनकी आंखों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पाया. एक दशक तक उनकी दाहिनी आंख की रोशनी पूरी तरह चली गई थी, और बाईं आंख से केवल रोशनी का आभास ही हो रहा था. सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि उनकी बाईं आंख में लगा पुराना कृत्रिम लेंस अपनी जगह से खिसक चुका था और कॉर्निया और आइरिस को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा था.
डॉक्टरों ने अपनाई '5F-ISHF' तकनीक
इस कठिन चुनौती का समाधान खोजने के लिए डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल की सर्जिकल टीम ने अपनी पूरी विशेषज्ञता लगाई. डॉ. सुसान जैकब के नेतृत्व में एक ही सर्जरी में कई जटिल प्रक्रियाएं पूरी की गईं. सबसे पहले, जो कृत्रिम लेंस गलत स्थान पर लगा था, उसे हटाया गया. इसके बाद, एक नई और उन्नत तकनीक ‘5F-ISHF’ का उपयोग करते हुए लेंस को फिर से स्थापित किया गया. यह तकनीक पूरी दुनिया में अपनी तरह का पहला प्रयास था.
सर्जरी के बाद आंखों की रोशनी में चमत्कारी सुधार
सर्जरी के तुरंत बाद, मरीज की बाईं आंख की रोशनी 6/24 तक वापस आ गई. यह उनके लिए न सिर्फ एक चिकित्सकीय सफलता थी, बल्कि जीवन को फिर से शुरू करने का एक नया मौका भी था. रोशनी लौटने के बाद, वह अपनी चिकित्सा प्रैक्टिस में वापस लौट आईं और मरीजों की सेवा करना शुरू किया. डॉक्टरों का मानना है कि जैसे-जैसे उनकी आंखें पूरी तरह से ठीक होंगी, उनकी दृष्टि में और भी सुधार होगा.
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