महिला आतंकवादियों के लिए ट्रेनिंग सेंटर बना रहा लश्कर-ए-तैयबा, भारत के खिलाफ कैसी साजिश रच रहे मुनीर?

पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को लेकर नई जानकारी सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक, संगठन महिलाओं को ऑपरेशनल भूमिकाओं के लिए तैयार करने की योजना बना रहा है.

Lashkar-e-Taiba is building a training center for women terrorists
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को लेकर नई जानकारी सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक, संगठन महिलाओं को ऑपरेशनल भूमिकाओं के लिए तैयार करने की योजना बना रहा है. इसके लिए महिला कैडर के लिए एक खास ‘मरकज’ (अड्डा) भवन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जहां उन्हें आतंकी गतिविधियों और ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) जैसी जिम्मेदारियों का प्रशिक्षण देने की बात कही जा रही है.

अब तक संगठन की महिला विंग को मुख्य रूप से सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित माना जाता था. लेकिन हाल के घटनाक्रम को नीति में बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. महिला विंग की प्रमुख इफ्फत सईद के एक बयान के बाद यह चर्चा तेज हुई कि भविष्य में महिलाओं को अधिक सक्रिय और संवेदनशील भूमिकाएं दी जा सकती हैं.

सूत्रों के अनुसार, संगठन के वरिष्ठ कमांडर अब्दुर रऊफ ने इस्लामाबाद में स्थित मरकज कुबा अल इस्लाम का दौरा किया था. बताया जा रहा है कि इस परिसर में पिछले कुछ महीनों से निर्माण कार्य चल रहा था और इसे महिला कैडर की ट्रेनिंग के लिए विस्तार दिया जा रहा था. इस दौरे को संगठन की रणनीति में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है.

ऑपरेशन सिंदूर में हुआ नुकसान

रिपोर्टों के मुताबिक, 5 मई 2025 को चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस निर्माणाधीन मरकज को नुकसान पहुंचा था या वह आंशिक रूप से नष्ट हो गया था. हाल ही में सामने आए एक वीडियो को इसी परिसर के अंदर का बताया जा रहा है. इससे संकेत मिलता है कि वहां गतिविधियां फिर से शुरू हो सकती हैं या निर्माण कार्य जारी है. सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मामले पर नजर रखे हुए हैं और इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रही हैं.

महिलाओं की ऑपरेशनल भूमिका

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर महिलाओं को सीधे ऑपरेशनल भूमिकाओं में शामिल किया जाता है, तो यह संगठन की रणनीति में बड़ा बदलाव होगा. उनका मानना है कि आतंकी संगठनों द्वारा महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की कोशिशें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहले भी देखी गई हैं. हालांकि, ऐसे कदम क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी प्रयासों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं.

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