सीबीआई ने मनीष सिसोदिया पर किया जासूसी का केस, फीडबैक यूनिट से जुड़ा है मामला

    दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की मुश्किलें कम होने की बजाय बढ़ती जा रही हैं. शराब घोटाला मामले में सिसोदिया पहले से ही तिहाड़ और ईडी की हिरासत का सामना कर रहे हैं। अब उनके खिलाफ एक और मामला दर्ज किया गया है। यह मामला दिल्ली सरकार की फीडबैक यूनिट से जुड़ा है।

    दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की मुश्किलें कम होने की बजाय बढ़ती जा रही हैं. शराब घोटाला मामले में सिसोदिया पहले से ही तिहाड़ और ईडी की हिरासत का सामना कर रहे हैं। अब उनके खिलाफ एक और मामला दर्ज किया गया है। यह मामला दिल्ली सरकार की फीडबैक यूनिट से जुड़ा है।

    सिसोदिया के अलावा इन अधिकारियों पर लगा है आरोप

    जानकारी के मुताबिक, पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया पर अपने पद का गलत इस्तेमाल करने और फीडबैक यूनिट का इस्तेमाल कर 'राजनीतिक निगरानी' करने का आरोप है. सिसोदिया के अलावा, आईआरएस अधिकारी सुकेश कुमार जैन, सेवानिवृत्त सीआईएसएफ डीआईजी राकेश कुमार सिन्हा, आईबी के संयुक्त उप निदेशक प्रदीप कुमार पुंज, सेवानिवृत्त सीआईएसएफ सहायक कमांडेंट सतीश खेत्रपाल और गोपाल मोहन को भी आरोपी बनाया गया है।

    फीड बैक यूनिट केस क्या है? 

    2015 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद दिल्ली में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (Anti Corruption Branch) के नियंत्रण को लेकर मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल के बीच विवाद छिड़ गया। बाद में एसीबी का पूरा नियंत्रण उपराज्यपाल के पास चला गया। ACB काबू नहीं आने पर सीएम अरविंद केजरीवाल ने अपनी खुद की जांच एजेंसी खोलने का फैसला किया. इसके बाद फीडबैक यूनिट का गठन किया गया।

    फीडबैक यूनिट का काम दिल्ली सरकार के अधीन सरकारी विभागों, स्वायत्त निकायों, संस्थानों और अन्य संगठनों की निगरानी करना था। 29 दिसंबर 2015 को दिल्ली सरकार ने फीडबैक यूनिट बनाई। जबकि फरवरी 2016 से इस पर काम शुरू हुआ था।

    अब सीबीआई का आरोप है कि दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर फीडबैक यूनिट बनाई. सीबीआई का कहना है कि इस यूनिट को बनाने के पीछे नेक इरादे नहीं थे। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि फीडबैक यूनिट की अवैध स्थापना और कामकाज से सरकारी खजाने को 36 लाख रुपये का नुकसान हुआ।